विख्यात आध्यात्मिक गुरु ने खुद को मारी गोली, मौत के बाद मचा हड़कम्प, CM भी है दुखी


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देश के साथ साथ दुनिया के भी जाने माने आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर कर मौत को गले लगा लिया. गोली उनके सर में लगी थी. इस घटना के बाद उन्हें इंदौर के बॉम्‍बे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. ऐसा कहा जा रहा है कि भय्यूजी महाराज ने अपने आवास पर खुद को लाइसेंसी पिस्‍टल से गोली मारी. हालांकि अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है. पुलिस शव को कब्‍जे में लेकर मामले की छानबीन में जुट गई है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भय्यूजी महाराज की मौत पर शोक जताया है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश ने देश ने एक ऐसे व्यक्ति खो दिया है जो संस्कृति, ज्ञान और निःस्वार्थ सेवा का संगम था. बता दें कि भय्यूजी महाराज उन 5 संतों में शामिल थे जिन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था. भय्यूजी महाराज का जीवन परिचय बेहद दिलचस्प है. इनका वास्तविक नाम उदय सिंह देशमुख है, लेकिन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इन्हें लोग भय्यूजी महाराज के नाम से जानते हैं. भय्यूजी महाराज एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु थे जो गृहस्थ जीवन जीते थे. उनकी एक बेटी कुहू है.

आईये जानते हैं उनके बारे में ये अहम बातें:
-भैय्यूजी महाराज मॉडल रह चुके हैं. मॉडलिंग का करियर छोड़कर उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना था. वे सियाराम शूटिंग के मॉडल रह चुके हैं.
-वह दूसरे आध्यात्मिक गुरु से बिल्कुल अलग थे. वह कभी खेतों की जुताई करते देखे जाते, तो कभी क्रिकेट खेलते हुए. घुड़सवारी और तलवारबाजी में भी वे पारंगत थे.

-29 अप्रैल 1968 में मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में जन्मे भय्यूजी के चहेतों के बीच धारणा है कि उन्हें भगवान दत्तात्रेय का आशीर्वाद हासिल है.
-महाराष्ट्र में उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा मिला हुआ थे. वह सूर्य की उपासना करते थे. घंटों जल समाधि करने का उनका अनुभव थे.

-भैय्यूजी महाराज के ससुर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं. केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख से उनके करीबी संबंध थे.
-महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें संकटमोचक के तौर पर देखा जाता था.

-वो ग्लोबल वॉर्मिंग से भी चिंतित थे, इसीलिए गुरु दक्षिणा के नाम पर एक पेड़ लगवाते थे. 18 लाख पेड़ उन्होंने लगवाए थे.
-आदिवासी जिलों देवास और धार में उन्होंने करीब एक हजार तालाब खुदवाए थे. वह नारियल, शॉल, फूलमाला भी नहीं स्वीकारते.


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