भागलपुर कांड: अर्जित की जमानत अर्जी पर सुनवाई से जुड़ी एक बड़ी खबर, कोर्ट ने सरकारी वकील को दिया यह आदेश


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भागलपुर ले नाथनगर में हुई हिंसा भड़काने में नामजद केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के पुत्र भाजपा नेता अर्जित शाश्वत की अग्रिम जमानत को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. कहा जा रहा है कि अर्जित की अग्रिम जमानत की अर्जी पर मंगलवार को जिला न्यायालय में सुनवाई हुई. इस दौरान दोनों पक्ष के वकीलों दलीलें पेश की गई. जिसे सुनने के बाद प्रभारी सेशन जज सह एडीजे-4 कुमोद रंजन सिंह की अदालत ने इस अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया.

इस मामले में अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी. एडीजे-4 कुमोद रंजन सिंह की अदालत ने मंगलवार की शाम में 5 बजे सरकारी वकील को बुलाकर 31 मार्च तक केस डायरी कोर्ट में जमा करने को कहा. बहस सुनने के लिए कोर्ट परिसर में भारी संख्या में भाजपा के नेता मौजूद थे. मालूम हो कि 17 मार्च को हिंदू नववर्ष पर निकाली गई संदेश यात्रा के दौरान चंपापुल के पास बवाल मच गया था. अर्जित के साथ 9 अन्य आरोपियों के खिलाफ नाथनगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी.

बहस के दौरान बचाव पक्ष के वकील बीरेश मिश्रा ने कोर्ट में यह कहा कि पुलिस ने बिना सबूत के अर्जित का नाम एफआईआर में डाल दिया. एफआईआर में पुलिस ने जुलूस में हो रही नारेबाजी का जिक्र किया है, लेकिन अर्जित की क्या भूमिका रही, इसपर कुछ नहीं लिखा है. जबकि अंतिम पैरा में पुलिस ने अर्जित का नाम डालकर जुलूस के नेतृत्वकर्ता बताते हुए मुख्य आरोपी बनाया. अर्जित ने ऑस्ट्रेलिया से इंजीनियरिंग की है, राजनीतिज्ञ परिवार से हैं. पिछली बार भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़े हैं. ऐसे में पुलिस ने अर्जित को विरोधियों के इशारे पर फंसाने का काम किया है. अर्जित की गिरफ्तारी के लिए वारंट भी निर्गत है. तमाम स्थितियों को देखते हुए अर्जित की गिरफ्तारी पर राेक के आदेश दिए जाएं.

जबकि सरकारी पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद साह ने दलील अर्जित को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं मिलना चाहिए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि अर्जित ने सरकारी कर्मियाें पर काम में बाधा डालने के लिए आपराधिक बल का उपयोग किया. साथ ही किसी धर्म को ठेस पहुंचाने के लिए जुलूस में उत्तेजक नारेबाजी की. माहौल बिगड़ने के बाद पुलिस जब एक्शन में आई तो जुलूस से पथराव व गोलीबारी होने लगी. जुलूस का नेतृत्व अर्जित कर रहे थे. वे राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं, राजनीतिक लाभ के लिए ही अर्जित ने सारा बवाल कराया. ऐसे में अर्जित को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं मिलना चाहिए.

बता दें कि 17 मार्च को नाथनगर में हुए बवाल के दूसरे मामले (थाना कांड संख्या 177/18) में एसीजेएम कोर्ट ने मंगलवार को 12 अन्य नामजद आरोपियों का गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. देर शाम नाथनगर थानेदार मो . जनीफउद्दीन की अर्जी पर कोर्ट ने मुहर लगाई. पुलिस ने दावा किया है कि सभी नामजदों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य आरोप-पत्र में है. ये भी गिरफ्तारी के डर से फरार हैं.


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