आखिर सऊदी ने ढूंढ ही निकाला अर्थव्यवस्था को तेज़ी से बढ़ाने का उपाय, तेल नहीं बल्कि यह क्षेत्र होगा


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सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जब से क्राउन प्रिंस का पद संभाला है जब से सऊदी अरब में कई बड़े बदलाव हुए है. महज़ एक साल में बिन सलमान ने सऊदी का तख्ता पलट कर दिया है. बिन सलमान ने क्राउन प्रिंस का पद ग्रहण करते ही सऊदी में “विज़न 2030” चलाया. जिसका मकसद 2030 तक सऊदी को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनाया है. सऊदी की तेल पर निर्भरता को खत्म कर अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए अन्य संसाधन खोजना है.

आपको बता दें कि, जब सऊदी में तेल नहीं तब सऊदी सरकार सिर्फ हज पर निर्भर कर थी. इस साल 2 मिलियन से ज्यादा मुसलमानों ने रविवार को सऊदी अरब में हज शुरू किया. हज हर साल होनेवाले दुनिया के बड़े आयोजनों में एक है. विश्व बाज़ार में तेल की कीमतों में उतार-चड़ाव को मद्देनजर रखते हुए सऊदी ने फिर से ‘हज’पर फोकस कर लिया है. क्योंकि जिस तादाद में हाजी सऊदी आ रहे है. वह तादाद साल डर साल बढती ही जा रही है. सऊदी अरब को उम्मीद है कि वहां साल 2030 तक हर वर्ष 3 करोड़ हज यात्री आएंगे। पिछले 25 वर्षों में करीब 5 करोड़ 40 लाख लोग हज यात्रा पर सऊदी अरब जा चुके हैं.

इसी के साथ सऊदी ने पर्यटन को भी बढ़ावा दिया है. हज साल में एक बार जबकि उमरा पूरे साल चलता रहता है. हज और उमरा करनेवालों के आगमन से सऊदी अरब को हर वर्ष करीब 12 अरब डॉलर (करीब 840 अरब रुपये) की आमदनी होती है. इनमें हज का हिस्सा 5 से 6 अरब डॉलर (करीब 4 खरब रुपये) का है. यह रकम सऊदी अरब की कुल जीडीपी का 7% है जबकि तेल को छोड़कर शेष सभी मदों से होनेवाली आमदनी का करीब 20% है.

वहीँ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि, 2022 तक तीर्थाटन से आमदनी बढ़कर 150 अरब डॉलर (करीब 10476 रुपये) से भी अधिक हो जाएगी. इस लिहाज से मक्का में कई आलीशान होटल बन गए हैं. ये ऐसी जगहों पर स्थित हैं जिनसे मक्का मस्जिद सीधे दिख जाती है. यहां एक सुइट में रात भर ठहरने के लिए 5,880 डॉलर (करीब 4 लाख रुपये) तक चुकाना पड़ सकता है.
इनपुट: WNA



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