खाड़ी देशों से बैग ले जाने पर हज़ारों रुपए की और शुल्क लागू, ये हैं नयी लिमिट, भार, दाम और सब कुछ…

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देश की कई एयरलाइंस कंपनियों ने चेक-इन बैगेज में खाड़ी देश और अंतरस्त्रिय उड़ानो में अतिरिक्त वजन के लिए वसूले जाने वाले शुल्क को बढ़ा दिया है. इसमें इंडिगो, स्पाइसजेट और गो एयर शामिल है. अन्य एयरलाइंस कंपनियां भी जल्द इसका एलान कर सकती हैं.

कंपनियों अब 15 किलो से अधिक चेक-इन लगेज पर 400 रुपये प्रति किलो की दर से शुल्क वसूलेंगी. इसेस पहले यह शुल्क 300 रुपये प्रति किलो था. अतिरिक्त 10 किलो के लिए 3,800 रुपये, अतिरिक्त 15 किलो के लिए 5,700 रुपये और अतिरिक्त 30 किलो पर 11,400 रुपये का शुल्क देना होगा.

गौरतलब है कि इंडिगो ने पिछले साल ही अपनी प्री-बुकिंग बैगेज चार्जेच को बढ़ाकर अतिरिक्त 5 किलो के लिए 1,425 रुपये, अतिरिक्त 10 किलो के लिए 2,850 रुपये, अतिरिक्त 15 किलो के लिए 4,275 रुपये और अतिरिक्त 30 किलो के लिए 8,550 रुपये किया था.

इसके लिए इंडिगों ने ईंधन की महंगाई का हवाला देते हुए हाल ही में घरेलू उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज में 400 रुपये का इजाफा किया था. साथ ही इंडिगो ने कहा है कि यदि उसके ग्राहकों ने लाइट फेयर रिपोर्ट के साथ बुकिंग की है, तो उन्हें, नियमित 15 किलो लगेज सीमा के लिए 200 रुपये चुकाने होंगे.

इस बीच जेट एयरवेज ने लगेज के नियमों में भी बदलाव किया है. कंपनी ने अतिरिक्त लगेज शुल्क को 400 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति किलो कर दिया है. इसके अलावा 15 किलो की लगेज-अनुमति में घरेलू हवाई यात्रियों को केवल एक ही बैग लेकर जाने की अनुमति होगी.

घरेलू उड़ानों में 15 किलो के अतिरिक्त लगेज के लिए कंपनी यात्री से 3,999 रुपये का शुल्क वसूलेगी. यह नियम 15 जुलाई से लागू होगा. हालांकि, प्रीमियर श्रेणी के यात्री 15 किलोग्राम तक के दो चेक-इन बैग लेकर जा सकेंगे.

इससे पहले 25 किलोग्राम की बैगेज अनुमति देने वाली एयरइंडिया ने अपने बैगेज शुल्क को 400 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति किलो किया था. कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में यह फैसला किया था, जबकि दूसरी कंपनियों ने इस फैसले के बाद यह कदम उठाया है.

जहां तक स्पाइसजेट का सवाल है तो कंपनी ने 5, 10, 15, 20 और 30 किलो सामान की प्री-बुकिंग चार्जेज को क्रमश: 1,600 रुपये, 3,200 रुपये, 4,800 रुपये, 6,400 रुपये और 9,600 रुपये कर दिया है. जनवरी 2017 के बाद हवाई ईंधन 40 फीसदी महंगाई हुआ है, जिसके बाद कंपनियां लगातार शुल्क बढ़ा रही हैं.


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