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देश के सबसे बड़े न्यायालय सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज एक ऐसा फैसला लिया है जिसे जानने के बाद देश के सभी नेताओं के बीच खलबली मच जाएगी. इसमें जदयू और बीजेपी समेत कई दलों के विधायक और सांसद शामिल है. साथ ही इस फैसले से बिहार की राजनीति पर भी जमकर असर पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केंद्र को उन राज्यों को अनुपात में 7.8 करोड रुपये आवंटित करने का आदेश दिया है जहां सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए 12 विशेष अदालतें स्थापित की जायेंगी. राज्य सरकारें उच्च न्यायालयों की सलाह से फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करें और सुनिश्चित करें कि वे एक मार्च 2018 से काम करना शुरू कर दें.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पुरे देश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों का आंकडा इकट्ठा करने और उसके मिलान के लिए केंद्र को दो महीने का वक्त दिया है. मीडिया रिपोर्ट की माने टी बिहार के नवनिर्वाचित 243 विधायकों में से 142 यानी 58 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. एडीआर यानी बिहार इलेक्शन वाच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स के अध्ययन के अनुसार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुल विधायकों में से 90 यानी 40 फीसदी पर हत्या, हत्या के प्रयास, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे संगीन मामले दर्ज हैं, जिसमें 70 विधायकों पर आरोप तय किये जा चुके हैं.

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक अपने खिलाफ चुनाव के दौरान हलफनामें में आपराधिक मामला बताने वाले 142 विधायकों में से 70 ने बताया है कि कोर्ट ने उनके खिलाफ पहले ही आरोप तय कर दिया है. इनमें से 11 विधायकों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है. आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल के वर्तमान 80 विधायकों में से 46 विधायक आपराधिक छवि के हैं. वहीं जदयू के 71 विधायकों में से 34 पर मामला दर्ज है. भाजपा के भी 53 विधायकों में से 34 विधायक आपराधिक छवि के हैं. जबकि कांग्रेस के 27 में से 16 विधायकों पर आपराधिक मामला दर्ज है.

लोजपा के एक और निर्दलीय एक विधायक आपराधिक छवि के हैं. बिहार के सांसदों की बात करें, तो 40 सांसदों में से 28 ऐसे हैं, जिनके खिलाफ कोई न कोई मामला दर्ज है. सबसे ज्यादा खराब स्थिति विधायकों की है, जिन पर संगीन अपराध के मामले भी दर्ज हैं. चुनावी हलफनामे की माने तो कई विधायकों पर अपहरण, हत्या, महिलाओं के साथ दुष्कर्म और सांप्रदायिकता फैलाने का मामला भी दर्ज है. इस मामले को कोर्ट के काफी गंभीरता से लेते


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Digital Desk

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