सऊदी जाने वालों के लिए बड़ी खुशख़बरी, अभी अभी सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने किया ये बड़ा हस्ताक्षर


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अपने देश के निवासियों को तेल पर कम निर्भर रख कर देश के निवासियों को रोजगार के नए क्षेत्रों में धकेलना क्राउन प्रिंस बिन सलमान के विज़न 2030 का हिस्सा है, सऊदी क्राउन प्रिंस ने पहले से ही एक परियोजना के लिए हस्ताक्षर किये हैं, जिसका नाम निओम परियोजना है, जिसका उद्देश्य सऊदी अरब में लन्दन से बड़ी मेगासिटी बनाना है.

सॉफ्टबैंक के साथ किया समझौता 

सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान इन दिनों अमेरिका यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने मंगलवार को जापान की निवेश कंपनी सॉफ्टबैंक के साथ बड़े प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसका उद्देश्य सऊदी अरब में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पॉवर प्लांट बनाना है और बताया जा रहा है की सॉफ्टबैंक के साथ हुए इस समझौते से सऊदी अरब देश में 2030 तक कुल 200 गीगावॉट पावर के सोलर प्लांट्स बनाना चाहता है.
इस परियोजना से राज्य में एक घरेलू सौर उपकरण विनिर्माण उद्योग के निर्माण का समर्थन होने की संभावना है. इसमें कहा गया है कि 2019 तक 3 गिगावाट और 4.2 गीगावाट बनाने की क्षमता वाला दो सौर संयंत्र शुरू किए जाएंगे.

समझौते में यह भी कहा गया है कि दोनों पार्टियां सऊदी अरब में सौर भंडारण प्रणालियों के निर्माण और विकास की खोज के लिए प्रतिबद्ध हैं, साथ ही व्यावसायिक मात्रा में सौर पैनलों के अनुसंधान और विकास के लिए विशेष कंपनियों की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध हैं.

सौजन्य से-ट्विटर

सॉफ्टबैंक के चेयरमैन ने कहा की 

सॉफ्टबैंक के चेयरमैन और सीईओ मसायोशी सन ने कहा, हमारी कंपनी सोलर प्रॉजेक्ट में सऊदी की पूरी मदद करेगी, इस प्रॉजेक्ट से सऊदी आने वाले समय में दुनिया के लिए सोलर पावर का हब (केंद्र) भी बन सकता है. ये भी मुमकिन है कि सऊदी सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री शुरू कर दे. यानी सोलर तकनीकों का उत्पादन और उसे दुनियाभर में निर्यात करे।. इस तरीके से वो तेल और गैस निर्यात से होने वाली आमदनी को कम कर सकता है.

सौजन्य से-ट्विटर

इस समझौते के फायदे 

अल अरेबिया के अनुसार यह उम्मीद की जा रही है की यह सऊदी अरब में ईंधन ऊर्जा उत्पादन में मदद करेगा, जो दुनिया के तेल-आधारित बाजारों की आपूर्ति करने में राज्य की भूमिका को बढ़ावा देगा, विशेष रूप से तेल की मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि कुछ क्षेत्रों में उत्पादन कम हो रहा है.

अल अरेबिया की खबरों के अनुसार इस परियोजनाओं से उम्मीद की जा रही है की सऊदी अरब में अनुमानित 200,000 नौकरियां खाली होंगी, और 12 अरब डॉलर में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि होगी, साथ ही साथ वार्षिक अनुमानित राशि 40 अरब डॉलर बचा सकती है.


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