सऊदी अरब: भारतीय, एशियाई प्रवासियों को देना होगा इतना टैक्स वरना, छोड़ना होगा सऊदी


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इस महीने सऊदी अरब में कई एशियाई प्रवासियों के लिए यह आखिरी साल है क्योंकि इसके बाद वह हमेशा के लिए सऊदी छोड़ कर चले जाएँगे. अब प्रवासियों के बच्चों की स्कूल परीक्षा भी खत्म होने को है, तो प्रवासी भी सऊदी छोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है. प्रवासियों के लिए सऊदी छोड़कर जाने वाला फैसला बहुत दुःखद साबित हो रहा है.
 

प्रवासियों के सऊदी छोड़ने की वजह 

सऊदी अरब में रहकर काम करने वाले ख़ुशी से नहीं बल्कि प्रवासियों पर लागू किये जाने वाले टैक्स की वजह से मजबूरन उन्हें सऊदी छोड़कर जाना पड़ रहा है. प्रवासियों पर लागू किया जाने वाले टैक्स को इतना ज्यादा बढ़ा दिया गया है. जिसके चलते प्रवासियों के पास सऊदी अरब छोड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है.
 

 “प्रविसियों पर टैक्स लागू” 

1 जुलाई, 2017 को सऊदी अरब का पहला प्रवासी कर (टैक्स) लागू किया गया था. हर प्रवासी को मासिक शुल्क के तौर पर 100 सऊदी रियाल देना पड़ता है – यह दर 2020 तक और भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है. नए टैक्स ने सऊदी में रहने वाले लाखों प्रवासियों के जीवन को प्रभावित किया है.

विज़न 2030 और सऊदीकरण

विज़न 2030 के तहत सऊदी ने तेल पर निर्भरता को खत्म करने का फैसला किया है. अब सऊदी नागरिकों को पब्लिक और प्राइवेट विभाग में नौकरियां दी जाएंगे. साथ ही सऊदी के हर विभाग का राष्ट्रीयकरण भी किया जाएगा. यानी सऊदी के हर विभाग में अब सऊदी पुरुष और महिलाओं को ही काम करने दिया जाएगा.
 

“3 साल के अंदर पब्लिक सेक्टर से निकाला जाएगा सभी प्रवासियों को”

 
2017 में, सिविल सेवा के राज्य मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों से तीन साल के अंदर-अंदर प्रवासी श्रमिकों के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के लिए कहा गया था. मंत्रालय के मुताबिक, वर्तमान में 70,000 प्रवासी कर्मचारी पब्लिक सेक्टर में काम करते हैं.
 
सिविल सेवा मंत्री अब्दुल्ला अल-मल्फी द्वारा एक बैठक के दौरान यह घोषणा की गई थी जिसमें 2020 तक “रोजगार राष्ट्रीयकरण (सऊदीकरण) योजना” को पूरी तरह कार्यान्वित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.


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