भागलपुर में अब नहीं सुनाई देगी चंपा बहन की मधुरआवाज, आज हो गया उनका निधन, मर्माहत हैं लोग


भागलपुर: ‘आरु सब्भै क चम्पा के नमस्कार…’ के साथ आकाशवाणी भागलपुर से प्रतिदिन प्रसारित ग्रामजगत खेती गृहस्थी कार्यक्रम का आगाज करने वाली चंपा बहन अलविदा हो गईं। अब आकाशवाणी से उनकी मधुरआवाज सुनने को नहीं मिलेगी। ग्रामजगत खेती गृहस्थी कार्यक्रम में विरजू भाई और चंपा बहन की जोड़ी श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय थी। हर तबके के लोग इन दोनों को सुनने के लिए रेडियो पर जमे रहते थे। विरजू भाई यानी डॉ. विजय कुमार मिश्र और चंपा बहन यानी सांत्वना साह। सांत्वना साह ने गुरुवार को बेंगलुरू में आखिरी सांस लीं। निधन की सूचना मिलने पर आकाशवाणी भागलपुर सहित शहर के बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, नाटककारों, कवि सहित आम लोग मर्माहत हैं। रेडियो के श्रोताओं ने जैसे ही यह खबर सुनी सभी हतप्रभ रह गए।

आकाशवाणी भागलपुर में सांत्वना साह 13 दिसंबर 1990 से कार्यरत थीं। हिन्दी के उद्घोषक कम्पीयर के नाते उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। वे आकाशवाणी में ग्रामजगत के अलावा अंग दर्पण, गूंजे बिहार कार्यक्रम भी करतीं थीं। पिछले कुछ समय से वह बीमार थीं। आकाशवाणी से उनका अंतिम कार्यक्रम ग्रामजगत में 9 अप्रैल को हुआ था। सांत्वना साह अप्रैल 2019 में सेवानिवृत होने वाली थीं।

अप्रैल माह से थीं बीमार

10 अप्रैल को सांत्वना साह कोलकाता के एक स्वास्थ्य शिविर में भाग लेने जा रहीं थीं। अपने भतीजे प्रणवीर के साथ ट्रेन पर जाने के क्रम में ही वह काफी बीमार हो गईं। वह पिछले कुछ माह से याददास्त खोने की बीमारी से जूझ रहीं थीं। बीच रास्ते में ट्रेन से उतरकर सांत्वना साह दूसरे डिब्बे में चलीं गईं। इसकी सूचना प्रणवीर ने सांत्वना साह के दोनों पुत्रों को दी। सांत्‍वना साह के पुत्र सलील ने अपनी मां को कोलकाता से बेंगलुरू लाने को कहा। सांत्वना के दोनों पुत्र सलील और सौरभ बेंगलुरू में कार्यरत हैं। इस बीच सलील कोलकाता आए आ गए और उन्‍होंने प्रणवीर के साथ अपनी मां को बेंगलुरू ले गए। दोनों पुत्रों ने अपनी मां को वहीं अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सक ने माथे पर ट्यूमर होने की बात कही। ट्यूमर ने कैंसर का रूप ले लिया था। जो चौथे स्टेज में पहुंच गया था।

इसके बाद वहीं अपोलो में उन्हें भर्ती कराया गया। जहां कैंसर सहित ट्यूमर का इलाज किया जा रहा था। वहां उन्हें चार कीमोथेरेपी कराया गया। पांचवां और आखिरी कीमोथेरेपी दिसंबर में होना था। लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत बेंगलुरू में अपने पुत्र के आवास पर हो गया। यहां बता दें कि आकाशवाणी भागलपुर में कार्य के दौरान ही उन्हें यादास्त खोने की बीमारी होने लगी थी।

लेखिका, कवयित्री, नाटककार और निर्देशक थीं सांत्वना साह

सांत्वना साह बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं। उनकी रचित दो पुस्तकें प्रकाशित हुई है। उन्होंने बच्चों के लिए कविता की भी पुस्तक लिखी। वे आकाशवाणी भागलपुर की वरीय नाटककार और लोकगीत गायिका भी थी। लोकगीत रचना करने के अलावा उन्होंने कई कविताएं भी रचीं। रेडियो से प्रसारित होने वाले कई नाटकों के मुख्य पात्र की भूमिका भी उन्होंने निभाईं थीं, जिसे काफी प्रशंसा मिली थी। उन्होंने कई कार्यक्रमों के अलावा कई नाटकों और रूपकों के निर्देशन भी किए थे।

शुक्रवार को होगा दाह संस्कार

उनके पुत्र सलिल ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर गुरुवार की देर रात भागलपुर लाया जाएगा। शुक्रवार को उनका दाहसंस्कार सुल्तानगंज घाट पर दो बजे किया जाएगा। भागलपुर में पटल बाबू रोड के पास उनका आवास है। उनका पार्थिव शरीर आकाशवाणी भी लाया जाएगा।
साभार: JMB

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