भागलपुर मामले में FIR के बाद अभी नहीं तक नहीं हुई गिरफ्तारी, चौबे ने प्रशासन को ही दिखा दी आंख, आक्रोश में विपक्ष…


बिहार के भागलपुर में धार्मिक जुलूस के दौरान भड़की हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के पूर्व अर्जित शाश्वत पर भी FIR दर्ज हुए काफी घंटे गुजर गये हैं, लेकिन अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं किये जाने से बिहार की नीतीश सरकार और केंद्र सरकार सवालों के घेरे में आ चुकी है. क्योंकि यह बिहार में साम्प्रदायिक एकता भंग करने का मामला है, इसलिए जनता भी इस मामले में काफी एक्टिव है और माहौल खराब करने वालों पर कड़ी कार्रवाई चाहती है. यह और बात है कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे अपने पुत्र को निर्दोष बता रहे हैं. लेकिन एक सच यह भी है बिहार की जनता आँख मूंदे नही खड़ी है, चुचाप सब देख रही है. ऐसा विपक्ष का भी कहना है. भागलपुर के एसपी मनोज कुमार की माने तो इस मामले में नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, इनमें अश्वनी चौबे के बेटे का भी नाम है. इसके अलावा 400-500 अज्ञात लोगों के खिफाफ भी मामला दर्ज किया गया है.

प्राथमिकी में कही गयी है यह बात:
नाथनगर थाने में तैनात दरोगा हरि किशोर सिंह के बयान पर दर्ज प्राथमिकी में अर्जित शाश्वत के अलावा भाजपा नगर अध्यक्ष अभय घोष उर्फ सोनू, प्रमोद वर्मा, देव कुमार पांडे, निरंजन सिंह, संजय, सुरेंद्र पाठक, अनूप लाल साह और अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है. इन लोगों पर बिना अनुमति के बाइक जुलूस निकालने तेज आवाज में डीजे में आपत्तिजनक गाना बजाने के साथ-साथ माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया गया. आपत्तिजनक गाने और नारे से एक समुदाय विशेष के लोगों की भावनाओं के आहत होने के बाद उस समुदाय के लोगों की ओर से आक्रोशित हो जाने की बात कही गई है. दर्ज प्राथमिकी में जुलूस का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री के पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे द्वारा किए जाने की बात कही गई है.

गिरफ्तारी न होने पर सवाल:
इस संगीन मामले में जिन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई उनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं किये जाने से बिहार में विपक्ष के तरफ से काफी सवाल उठाये जा रहे हैं. जबकि मुख्यमंत्री नीतीश द्वारा उचित कार्रवाई की जाने की बात कही गयी है, लेकिन 24 घंटे से ज्यादा का समय गुजर जाने के बाद बीजेपी नेता शाश्वत के साथ साथ अन्य लोगों को हिरासत में नहीं लिया गया. जिसको लेकर आज बिहार विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ. कांग्रेस और आरजेडी इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव की मांग कर रहे थे. जिस कारण सदन को स्थगित करना पड़ा. आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी जानबूझ कर दंगा करवाने पर तुली है. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि वो कानून के राज की बात करते है तो फिर अरिजीत शाश्वत की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही.

अपने पुत्र को निर्दोष मान रहे है चौबे:
अपने पुत्र और बीजेपी नेता अर्जित शाश्वत के खिलाफ पुलिस द्वारा FIR दर्ज होने के बाद भी केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने इसे साजिश और प्रशासन की गलती करार दिया है. वे अपने पुत्र को निर्दोष मान रहे हैं. उन्होंने कहा है कि भागलपुर का प्रशासन अंधा हो गया है. चौबे ने कहा कि शोभा यात्रा में कुछ अराजक तत्‍वों ने गलत कार्य किए. प्रशासन उन लोगों को गिरफ्तार करने में असमर्थ रहा. ऐसे में सभी आरोप शोभा यात्रा पर लगा दिए गए. उन्होंने कहा कि शोभा यात्रा निकाले जाने को लेकर कहा कि सभी नियमों के अनुसार निकाला गया था.

मुझे गर्व है:
लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए सदन पहुंचे चौबे ने आज कहा कि ‘मुझे गर्व है कि मैं एक भाजपा-आरएसएस का स्वयंसेवक हूं. मुझे भागलपुर के सभी श्रमिकों और निकाली गयी शोभायात्रा पर गर्व है. शोभा यात्रा को पुलिस एस्कॉर्ट कर रही थी. वहां सभी नियमों-प्रावधानों के अनुसार शोभा यात्रा निकाली गयी थी.’

राजनीति छोड़ दूंगा:
केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने आज भागलपुर मामले में एक बड़ा चैलेंज भी दिया है. उन्होंने कहा कि अगर मेरे बेटे पर लगे आरोप सही पाए गए और सिद्ध हो गये तो मैं राजनीति से सन्यास ले लूंगा. उन्होंने कहा कि इस मामले में मेरे बेटे को जान-बूझकर फंसाया जा रहा है. मालूम हो कि इससे पहले भी चौबे राजनीति छोड़ने की बात कर चुके हैं.

मेरा बेटा निर्दोष हैं:
अपने बेटे पर लगे आरोप को अश्विनी चौबे ने खारिज किया हैं. उन्होंने कहा “मुझे अपने बेटे के बीजेपी कार्यकर्ता और आरएसएस स्‍वयंसेवक होने पर गर्व है. मुझे उन सभी कार्यकर्ताओं पर भी गर्व है जो उस समय शोभायात्रा में मौजद थे.”

कई बार दे चुके हैं विवादित बयान:
अश्विनी चौबे अपने विवादित बयानों के जाने जाते है. उन्होंने कुछ महीनो पहले एक ऐसा बयान दिया जिसे बिहारियों ने अपमान समझा. केंद्रीय मंत्री और बक्सर से सांसद अश्विनी चौबे ने एक कार्यक्रम में कहा था कि बिहार के लोगों की वजह से दिल्ली के भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भीड़ बढ़ गई है. जिसके कारण जमकर विवाद हुआ था. उन्होंने कहा कि बिहार के लोग छोटी सी बीमारी को लेकर भी दिल्ली के एम्स पहुंच जाते हैं.

सोनिया पर कर चुके हैं विवादित टिप्पणी:
चौबे सोनिया गाँधी पर विवादित टिप्पणी करके भी सुर्ख़ियों में आये थे. जिसके बाद भी बीजेपी ने उनपर करवाई नहीं की थी. नवादा जिले के रजौली में अश्विनी चौबे ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पूतना बताते हुए कहा था कि लालू और नीतीश इस पूतना की गोद में बैठकर जहर पीने के लिए छटपटा रहे हैं. चौबे ने राहुल गांधी को विदेशी तोता बताया था. चौबे ने कहा था सोनिया तो इटली की गुडिय़ा है, जहर की पुडिय़ा है। देश में जहर मत घोलो. इसके बाद उन्होंने लालू-नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा था, लालू नेता नहीं हैं वह तो सजायाफ्ता हैं क्योंकि चारा घोटाले में जेल जा चुके हैं

बेटे को जितवाने के लिए चुनावी सभा में रोने लगे थे चौबे:
चौबे सीएमएस मैदान में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए फूट-फूट कर रोने लगे. उन्होंने कहा था कि अपनों ने ही मुझे जिंदा जला दिया. अगर मैं केदारनाथ हादसे में विलीन हो जाता तो आज यह दिन देखने का मौका नहीं मिलता. अगर अश्विनी चौबे स्वार्थी, गद्दार व भ्रष्टाचारी हो तो अर्जित शाश्वत (बेटा) को आपलोग एक भी वोट नहीं देना, पर यह लगे कि चौबे आतंकवादी को शह देने वाला नहीं है तो अर्जित को जरूर वोट देना. उन्होंने कहा, मैं आज अपनों से ही टूटता हुआ दिख रहा हूं. जिलाध्यक्ष अभय वर्मन से कहा कि मैं 25 तारीख तक समय देता हूं, जो भी रूठे हुए हैं, उनके साथ बैठक करें और तय करें कि यहां से कौन चुनाव लड़ेगा.

भागलपुर में इस दौरान बढ़ा था तनाव:
मालूम हो कि भागलपुर के नाथनगर में नववर्ष जागरण समिति के द्वारा रैली निकाली गई थी, जिसके बाद दो पक्षों में हुई मारपीट ने हिंसा का रूप ले लिया और इस रैली को लीड कर रहे केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत पर रैली के दौरान भड़काऊ भाषण देकर लोगों को उकसाने का आरोप लगा है. जुलूस के बाद दो पक्षों में हुई हिंसक झड़प में 60 लोग घायल हो गए थे.

शांतिप्रिय है भागलपुर की जनता
आपको बता दें कि भले ही काफी सालों के बाद इस तरह की हिंसा भागलपुर में हुई है लेकिन यहां की जनता काफी शांतिप्रिय है. भागलपुर कई बार भाई चारे का मिसाल भी कायम कर चूका है. इस हिंसा से थोड़ी क्षति जरुर हुई, इस बात को नाकारा नहीं जा सकता है, राजनितिक लाभ लेने के लिए कुछ लोग थोड़ी देर के लिए दो फाड़ करने में कामयाब भी रहे, लेकिन इस घटना के कुछ घंटों के बाद यहां की आवाम ने सबकुछ भूलकर एक दुसरे को गले लगाया. यहां के लोग अमन चाहते हैं और हर धर्म से सबका लगाव है.

DIG विकास वैभव का खुद हर धर्म से है लगाव
इतना ही नहीं भागलपुर के DIG विकास वैभव भी इन सब मामलों में काफी गंभीर रहते हैं वो किसी भी कीमत पर जिलें में शान्ति व्यवस्था भंग नहीं होने देना चाहते हैं. न तो वो खुद किसी जाती धर्म में विश्वास करते हैं न ही दूसरों को करने देना चाहते हैं. शायद यही वजह है कि भागलपुर के हर शख्स के दिल में उनकी जगह है. वो चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम, सिक्ख हो या इसाई सब उनके लिए बराबर है. सभी उनके लिए इस भारत माता की संतान है और कुछ भी नहीं. वो सबको अपना ही मानते हैं. हालांकि विकास वैभव कानून व्यवस्था से समझौता नहीं करते हैं. ऐसा हुआ भी, जो नाथनगर मामले में देखा गया. जब उनकी पुलिस ने तुरंत करवाई की और रसूखदारों के खिलाफ भी FIR किया गया. इनमें केंदीय मंत्री अश्विनी चौबे के पुत्र शाश्वत चौबे भी शामिल हैं.

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