बड़ा फैसला- सऊदी पर कड़े प्रतिबन्ध, तिल मिला उठेगा साउद साशन, हर जगह बैन का सामना करने पदेगा साउदी अरब को


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अमरीका के सेन्ट्रल बैंक ने सऊदी अरब को प्रतिबंध की धमकी दी है। हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार अमरीका के सेन्ट्रल बैंक ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब के आलोचक पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी के लापता होने की घटना के बाद सऊदी अरब पर प्रतिबंध लगने की संभावना है।

अमरीका के सेन्ट्रल बैंक ने अपने बयान में कहा कि सऊदी अरब पर प्रतिबंध, तेल के बाज़ार पर दुष्परिणाम के रूप में सामने आएगा।

जमाल खाशुक़जी, सऊदी पत्रकार थे जो सऊदी सरकार विशेषकर इस देश के युवराज मुहम्मद बिल सलमान की नीतियों के प्रबल आलोचक थे।खाशुक़जी, सऊदी सरकार की ब्लैक लिस्ट में शामिल थे और सरकार के डर के कारण सऊदी अरब के बाहर जीवन व्यतीत कर रहे थे।
2 अक्तूबर 2018 को जमाल ख़ाशुक़्जी उस समय लापता हो गये थे जब वह तुर्की के शहर इस्तांबोल में स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में प्रविष्ट हुए किन्तु वापस नहीं आए।
18 दिन गुज़र जाने और इस बीच बुरी तरह फंस जाने के बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को स्वीकार करना पड़ा कि वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की मौत हो गई है।

यह वही बिन सलमान हैं जो इससे पहले ब्लूमबर्ग को साक्षात्कार देते हुए बड़े आत्म विश्वास से कह रहे थे कि जमाल ख़ाशुक़जी तुर्की के इस्तांबूल शहर में स्थित सऊदी काउंसलेट में आए और वापस चले गए, हम भी यह जानना चाहते हैं कि जमाल कहां हैं?
बिन सलमान ने ढिठाई का प्रदर्शन करते हुए कहा कि काउंसलेट तो सऊदी अरब की संपत्ति है लेकिन यदि तुर्की की सरकार चाहे तो हम उसे काउंसलेट की इमारत की तलाशी लेने की अनुमति दे सकते हैं।
बिन सलमान ने सारी दुनिया की आंख में धूल झोंकने की कोशिश की क्योंकि बिन सलमान की धारणा यह है कि वह पेट्रो डालर की मदद से जो भी चाहें कर सकते हैं।
मगर जमाल ख़ाशुक़जी के मामले में तुर्की की इंटैलीजेन्स, अमरीकी मीडिया तथा अमरीकी कांग्रेस ने सिलसिलेवार ढंग से बहुत नपे तुले क़दम उठाए जिसके नतीजे में मुहम्मद बिन सलमान फंसते चले गए। वह इस बुरी तरह फंस गए कि उन्हें अपना पद भी ख़तरे में नज़र आने लगा है।
जब सब कुछ मुहम्मद बिन सलमान के हाथ से निकल गया तब उन्होंने अपने पिता सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ को हस्तक्षेप के लिए तैयार किया बल्कि यूं कहा जाए कि बिन सलमान अपने पिता की आड़ में छिप गए।

अब सऊदी अरब ने सरकारी तौर पर स्वीकार कर लिया है कि 2 अकतूबर से लापता पत्रकार जमाल ख़ाशुकजी की मौत हो गई है। रियाज़ सरकार ने अपने बयान में दावा किया है कि इस्तांबूल में काउंसलेट की इमारत के भीतर एक दर्जन से अधिक सऊदी अधिकारियों से जमाल ख़ाशुक़जी की लड़ाई हो गई जिसके दौरान ख़ाशुक़जी की मौत हो गई। ख़ाशुक़जी और अधिकारियों के बीच बातचीत के दौरान हाथापायी शुरू हो गई और ख़ाशुक़जी की मौत हो गई।
18 दिन तक सऊदी सरकार यही रट लगाए हुए थी कि पत्रकार के लापता होने की घटना में उसका कोई हाथ नहीं है। सऊदी अरब के सरकारी टीवी ने घोषणा की कि 5 वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है और 18 लोगों को गिरफ़तार किया गया है।
अमरीका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि मध्यपूर्व में सऊदी अरब हमारा महत्वपूर्ण घटक है लेकिन जो कुछ हुआ है उसे सहन नहीं किया जा सकता। साथ ही ट्रम्प ने कहा कि वह कांग्रेस के साथ मिलकर ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले में उचित कार्यवाही करने पर विचार कर रहे हैं लेकिन हम सऊदी अरब पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते क्योंकि इससे सऊदी अरब को अमरीका की ओर से हथियारों की बिक्री का सौदा प्रभावित होगा।
इस पूरे प्रकरण में तुर्क इंटैलीजेन्स ने बड़ी दक्षता के साथ ख़ुफ़िया जानकारियां मीडिया को धीरे धीरे जारी कीं इस तरह यह मुद्दा तीसरे सप्ताह में भी मीडिया में छाया रहा। यहां तक कि सऊदी सरकार को अपनी अकड़ छोड़नी पड़ी और यह स्वीकार करना पड़ा कि काउंसलेट के भीतर ही पत्रकार की मौत हो गई।

मगर अब भी बहुत से सवाल बाक़ी हैं। एक सवाल तो यही है कि तुर्क इंटैलीजेन्स के हवाले से मीडिया में जो ख़बरें आईं कि पत्रकार के शरीर को आरी से काटा गया और उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए गए उनके बारे में सऊदी सरकार क्या जवाब देगी।
जबकि सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि मौत के बाद पत्रकार की लाश का क्या हुआ। सऊदी सरकार ने निश्चित रूप से लाश को छिपा देने और पूरी तरह नष्ट कर देने की बड़ी कोशिशें की हैं और अब उसे जवाब देना पड़ेगा का ख़ाश़ुक़जी का शव कहां हैं और यदि पत्रकार का शव मिल जाता है तो पोस्ट मार्टम से बहुत से सवालों के जवाब मिल जाएंगे।
इस बीच यह मुद्दा भी गर्म है कि सऊदी सरकार इस मामले में कुछ सुरक्षा अधिकारियों और संभावित रूप से कुछ कूटनयिकों को बलि का बकरा बनाकर कहानी समाप्त कर देना चाहती है।
यही इच्छा अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की है जिनकी नज़रें सऊदी अरब की दौलत पर लगी हैं मगर दूसरी ओर सऊदी अरब और ट्रम्प पर इतना भारी दबाव है कि उन्हें बहुत से काम इच्छा के विपरीत करने पड़ रहे हैं।
दक्षिणी कैरोलीना के सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि सऊदी अरब की ओर से जो बयान आया है उसमें इस पूरे प्रकरण का महत्व कम करने की कोशिश की गई है।
सेनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा कि यह साफ़ है कि सऊदी अधिकारी टाइम पास करने की कोशिश कर रहे हैं मगर इस चक्कर में उनके जो भी नए जवाब हैं उनसे अनेक नए सवाल पैदा हो जाते


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