बिहार में B.Tech छात्रों के लिए आ रही ये बड़ी खुशखबरी। बढ़ाई गयी इन पदों की योग्यता


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इंटर के बाद बीटेक में प्रवेश लेने के साथ अच्छी नौकरी का ख्वाब लेकर पढ़ाई करने वाले आधे छात्र कॉलेजों से खाली हाथ ही डिग्री लेकर निकल रहे हैं। कॉलेजों में बीटेक उत्तीर्ण आधे छात्रों को भी नौकरी नहीं मिल रही। पांच वर्षों में नौकरी का यह आंकड़ा कभी भी 50 फीसदी से ऊपर नहीं गया। लाखों रुपये फीस लेने के बावजूद कॉलेज छात्रों को नौकरी दिलाने में विफल हैं। मेरठ में भी प्लेसमेंट का यही हाल है। देश-प्रदेश में बीटेक में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के सपनों की हकीकत यही है।

देश में इंजीनियरिंग कराने वाले इंस्टीट्यूट तो लाखों में हैं लेकिन जॉब देने में पीछे हैं। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के आंकड़ों के अनुसार सत्र 2012-13 से सत्र 16 -17  तक पास हुए बीटेक छात्रों में से आधों को कॉलेजों से कोई प्लेसमेंट नहीं मिला। हालांकि 12-13 के सापेक्ष कॉलेजों से प्लेसमेंट पाने में 15-16 सत्र की स्थिति सबसे बेहतर रही। बावजूद इसके आधे से ज्यादा छात्र कॉलेजों में लाखों रुपये और चार साल बिताने के बाद भी खाली हाथ ही वापस लौटे। इंसेट-मेरठ में है और बुरा हाल मेरठ। बीटेक में बाद कॉलेजों के प्लेसमेंट में मेरठ के इंजीनियरिंग कॉलेजों का हालत और खराब है।

इस बिच बिहार में मोटरयान निरीक्षक(एमवीआई) की बहाली के लिए नई नियमावली बनाई जा रही है। जिससे छात्रों को थोड़ी राहत मिलेगी।  परिवहन विभाग ने नई नियमावली के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गयी है। इसमें परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव चौधरी अनंत नारायण अध्यक्ष और उप सचिव विनय कुमार व ओएसडी आजीव वत्सराज सदस्य शामिल हैं। कमेटी को यह तय करना है कि नई नियमावली में किस-किस बिन्दु को रखा जाए।

एमवीआई की बहाली में छात्रों को अभी ऑटोमोबाइल में डिप्लोमा डिग्री व पांच साल का अनुभव चाहिए। लेकिन साथ साथ विभाग की योजना है कि वे एमवीआई की बहाली के लिए योग्यता को बढ़ाई जाए। अब एमवीआई बहाली के लिए डिप्लोमा की जगह पर बीटेक की डिग्री होगी। कमेटी भी एमवीआई की बहाली में बीटेक डिग्री की योग्यता पर एकमत है। अन्य राज्यों में एमवीआई की बहाली के लिए बीटेक डिग्री की योग्यता अनिवार्य है। पिछली बार एमवीआई बहाली का मुद्दा पटना हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक गया था और कोर्ट में बहाली की योग्यता पर भी सवाल उठा था। इसके बाद राज्य सरकार ने योग्यता बढ़ाने का निर्णय लिया था। हालांकि नई नियमावली को राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।


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