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अगर आपने फ्लाइट की टिकट को बुक कराने के अगले 24 घंटे के भीतर उसे कैंसिल कराया है तो आपको कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। सरकार ने मंगलवार को यह बात कही है। साथ ही सरकार ने फ्लाइट के कैंसिल होने या फिर उसमें चार घंटे से ज्यादा की देरी की सूरत में यात्रियों को फुल रिफंड देना भी प्रस्तावित किया है।

नया एयर पैसेंजर चार्टर उन नियमों में संशोधन करना चाहता है जो कि यात्रियों की ओर से टिकिल कैंसिल या रीशेड्यूल के एवज में लिए जाने वाले शुल्क से संबंधित है। अब यात्री 24 घंटे के लॉक-इन पीरियड के भीतर टिकट में अपने नाम और ट्रैवल डेट को बिना किसी शुल्क के बदल सकते हैं। यह जानकारी नागर विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने दी है। वो यहां पर एयर पैसेंजर चार्टर के ड्रॉफ्ट पर बात कर रहे थे। जानिए इस बदलावों से जुड़ी 10 बातों के बारे में..

यह प्रस्तावित नियम उस सूरत में लागू नहीं होगा अगर टिकिट की बुकिंग यात्रा के समय से 96 घंटे पहले (चार दिन) बुक की जाती है। इस चार्टर में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि अग फ्लाइट में 12 घंटे से ज्यादा की देरी होती है और इस वजह से वो अपनी फ्लाइट नहीं पकड़ पाते हैं तो उन्हें 20,000 रुपए बतौर मुआवजा दिए जाएंगे और अगर यह देरी 4 से 12 घंटे की होती है तो उन्हें 10,000 रुपए बतौर मुआवजा दिए जाएंगे।

अगर यात्री को फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी दो हफ्ते से कम समय से पहले और डिपार्चर टाइम से 24 घंटे पहले दे दी जाती है तो यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट मुहैया कराई जानी चाहिए। यह काम डिपार्चर के तय समय के दो घंटों के भीतर किया जाना चाहिए या फिर उन्हें वह रिफंड दिया जाना चाहिए जो उन्हें स्वीकार्य हो।

अगर ओरिजनल शेड्यूल टाइम से 24 घंटे पहले विमानन कंपनियों की ओर से यात्रियों को फ्लाइट में देरी की सूचना दे दी जाती है और या फ्लाइट में 4 घंटे से ज्यादा की देरी होती है तो विमानन कंपनी को टिकट के पूरे पैसे वापस करने की पेशकश करनी होगी। हालांकि सरकार ने यह साफ किया है कि मौसम संबंधी व्यवधानों के चलते इस तरह की समस्या के लिए विमानन कंपनियां जवाबदेह नहीं होंगी।

वहीं बोर्डिंग से इनकार किए जाने पर एयरलाइन्स को न्यूनतम 5,000 रुपए का भुगतान करना होगा,जैसा कि चार्टर में प्रस्तावित किया गया है। साथ ही चार्टर में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि एयरलाइन में ऐसी सीटें होनी चाहिए जो कि विकलांग और अक्षम लोगों के लिए सुलभ हों और जिनमें पर्याप्त लेग स्पेस की सुविधा हो। ये सब फ्री ऑफ चार्ज होगा।

प्रस्तावित चार्टर के मुताबिक कैंसिलेशन चार्ड के बारे में टिकिट में जानकारी का उल्लेख करना होगा। वहीं विमानन कंपनियां और एजेंट्स किसी भी स्थिति में बेसिक फेयर और फ्यूल सरचार्ज से अधिक कैंसिलेशन शुल्क नहीं वसूल सकते हैं।

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) उन मुद्दों पर विचार कर सकता है जहां एयरलाइंस मुआवजे के मुद्दे पर यात्री के साथ समझौते की स्थिति में न हों। चार्टर सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है और परामर्श प्रक्रिया 30 दिनों के लिए खुली होगी। नए नियमों के 15 जुलाई तक नोटिफाई किए जाने की उम्मीद है।
इनपुट:JMB


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Digital Desk

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