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नई दिल्ली. फेसबुक, नरेंद्र मोदी ऐप और कांग्रेस पार्टी के ऐप से डेटा लीक की घटनाओं के बाद हर कोई सजग हो गया है। यह सही है कि डेटा की पूरी जानकारी ऐप कंपनी को होती है, और उसे वह थर्ड पार्टी को देती है। उसकी पॉलिसी में इन बातों का जिक्र भी होता है। लेकिन पॉलिसी का पालन नहीं होने पर भी यूजर कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि देश में डेटा प्रोटेक्शन कानून अभी बना ही नहीं है। ऐप के जरिए कंपनियों की पहुंच आपके मोबाइल फोन के माइक और फोटो गैलरी तक हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम आदमी के डेटा का इस्तेमाल तब से होने लगा था जब से उसने स्मार्टफोन में ऐप डाउनलोड करना शुरू किया।

थर्ड पार्टी को डेटा शेयर करने पर कोई नियम नहीं
– डेटा लीक पर मास्टरिंग मेटास्प्लॉट, मेटोप्लॉयट बूट कैंप किताब लिखने वाले निपुन जायसवाल ने बताया कि थर्ड पार्टी को डेटा जाने के बाद इसका कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे, गूगल पर जो चीज ज्यादा सर्च करते हैं या पढ़ते हैं उससे संबंधित विज्ञापन और कंटेंट प्राथमिकता के साथ आने लगते हैं।
– उन्होंने कहा कि आईटी एक्ट में डेटा लीक को परिभाषित किया गया है, लेकिन थर्ड पार्टी को डेटा शेयर करने पर कोई नियम नहीं है।
– जायसवाल ने बताया कि कुछ ऐसे ऐप भी हैं जिनका आपके डेटा से कोई लेना देना नहीं। फिर भी वह आपके कैलेंडर, माइक, कॉन्टैक्ट्स, टेलीफोन, पिक्चर गैलरी आदि की अनुमति मांगता है।

यूजर ऐसे देते हैं अपना डेटा
– ऐप डाउनलोड के समय इस्टॉलेशन फाइल गूगल के सर्वर पर ले जाती है। ऐप इन्स्टॉल होने से पहले बताया जाता है कि यह आपसे फोटो, एसएमएस, कॉन्टैक्ट लिस्ट, आदि
का डेटा लेगा। यह अपने सर्वर से यूजर के मोबाइल को कनेक्ट करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1% से भी कम यूजर पॉलिसी पढ़ते हैं।

ओटीपी के बहाने यूजर की जानकारी
– गूगल, फेसबुक और वॉट्सऐप की सेवाएं लेने के लिए वीडियो, फोटो, कॉन्टैक्ट लिस्ट, एसएमएस जैसी जानकारी साझा करनी पड़ती है।
– आपके मोबाइल पर आए ओटीपी को भी ये पढ़ लेते हैं। ओटीपी के बहाने यूजर के एसएमएस की जानकारी ऐप के पास होती है।

मोबाइल फोन ही आपका ट्रेकर है
– गूगल के पूर्व कर्मी और पिरामिड सायबर सिक्यूरिटी एंड फॉरेंसिक में कार्यरत हर्ष दफ्तरी ने बताया कि सर्च करने पर गूगल की-वर्ड को स्टोर कर लेता है। कहां शॉपिंग की, यात्रा की, पैसे ट्रांसफर किए, यह मेल से भी ट्रैक होता है।

कैसे बचें: ऐप में गैरजरूरी एक्सेस डिसेबल करें
– सेटिंग्स में ऐप परमीशन का स्टेटस देखिए। जिनकी एक्सेस नहीं देनी उन्हें डिसेबल कर दें।
– दो मेल आईडी रखें। बैंक कम्युनिकेशन वाले आईडी को मोबाइल से कनेक्ट न करें।
– दो मोबाइल भी रख सकते हैं। एक पर सोशल मीडिया और दूसरे पर निजी काम करें।
ऐसे बंद कर सकते हैं कॉल डायवर्ट या फॉरवर्ड
#21#: इससे पता लगेगा कि आपकी कॉल या एसएमएस कहीं डायवर्ट तो नहीं की गई है।
#62#: इससे पता चलेगा कि वॉयस कॉल कहां फॉरवर्ड की गई है।
##002#: इसे डायल करते ही डायवर्ट और फॉरवर्ड की सभी सुविधाएं बंद हो जाती हैं।

अब तक के 5 बड़े डेटा लीक
1. 2013-14 मेंयाहू से 50 करोड़ लोगों की जानकारियां लीक हो गई थीं।
2. एडल्ट फ्रेंड फाइंडर का 2016 में 40 करोड़ लोगों का डेटा लीक हुआ था।
3. 2017 में इक्विफैक्स के 15 करोड़ यूजर्स की जानकारी लीक हो गई थी।
4. ईबेका मई 2014 में 14 करोड़ यूजर्स केपासवर्ड और अन्य डेटा लीक हुए थे।
5. 2008 मेंहर्ट लैंड पेमेंट से 13 करोड़ क्रेडिट कार्डकी जानकारी लीक हुई।

कानून बनने में लग जाएंगे 8 महीने
– डेटा प्रोटेक्शन एक्ट पर सरकार ने नवंबर में श्वेत पत्र जारी किया था। अधिकारियों के मुताबिक इस साल शीत सत्र में कानून लाने की कोशिश रहेगी।

कानून में किए जा सकते हैं ये प्रावधान
– डेटा लीक होनेपर 5-7 साल तक की सजा का प्रावधान संभव है।
– कंपनी पर 5 से 8 लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है।
– कंपनी डेटा यूजर को साझा करनेके लिए मजबूर नहीं करेगी।
– कंपनी को बताना होगा कि वह शेयर वालेडेटा का क्या करेगी।
– थर्ड पार्टी सेडेटा साझा करनेके लिए यूजर की मंजूरी लेनी होगी।
– थर्ड पार्टी को डेटा देनेके लिए उसका का नाम-वजह बतानी होगी।
– यूजर बाद में कभी भी कंपनी से साझा किया हुआ डेटा डिलीट करने के लिए कह सकता है। कंपनी को ऐसा करना पड़ेगा।
इनपुट:DBC


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Digital Desk

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