रांची में लाइट मेट्रो चलाने की संभावना लगभग समाप्त, लिया गया बड़ा फैसला


राजधानी रांची में लाइट मेट्रो चलाने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा तैयार की गई लाइट मेट्रो पॉलिसी के मापदंड पर रांची फेल हो गई है। नगर विकास विभाग ने वर्ष 2050 की आबादी को ध्यान में रखते हुए लाइट मेट्रो चलाने का प्रस्ताव केेंद्र सरकार को भेजा था। लेकिन, केंद्र सरकार ने पूछा है कि लाइट मेट्रो चलाने से पहले अन्य विकल्पों पर विचार क्यों नहीं किया गया। इसको देखते हुए नगर विकास विभाग फिलहाल बसें चलाने की तैयारी में जुट गया है। बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) पर काम शुरू करने का निर्णय लिया गया है। विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने झारखंड अर्बन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (जुटकोल) को 8 माह के अंदर पायलट प्रोजेक्ट के तहत बीआरटीएस पर काम शुरू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) गठित कर इस प्रोजेक्ट को शुरू करें। पहले फेज में कम से कम 100 बसें चलाने की योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

नगर विकास सचिव ने जुटकोल को 8 माह के अंदर पायलट प्रोजेक्ट के तहत बीआरटीएस पर काम करने को कहा, ट्रॉम सेवा पर भी होगा काम
टैक्सी, बस डिपो, बस स्टॉपेज, साइकिल ट्रैक, पाथ वे विकसित होंगे

शहर में जाम से निपटने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विकल्पों पर भी होगा काम
लगातार बढ़ रहे वाहनों की वजह से हमेशा जाम की स्थिति रहती है। आनेवाले स्थिति और खराब होगी। इसे देखते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विकल्पों पर काम शुरू करने की तैयारी है। सचिव ने कहा कि बीआरटीएस में बस चलाने के अलावा एक सेंट्रलाइज्ड कमांड कंट्रोल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करें ताकि मॉनिटरिंग हो सके। इसके अलावा कंप्रहेंसिव ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशन तैयार करने के लिए कहा गया। इसके तहत ट्रॉम सेवा, टैक्सी, बस डिपो, बस स्टॉपेज, साइकिल ट्रैक, पाथ वे विकसित करने पर काम शुरू करने का निर्देश दिया गया।

गुजरात और पुणे में सफल
गुजरात के अहमदाबाद और पुणे में डेडिकेटेड बीआरटीएस बनाया गया है। इसे अर्बन ट्रांसपोर्ट का सबसे सफल विकल्प माना जा रहा है। क्योंकि कम खर्च पर बड़ी आबादी को लाने ले जाने की सुविधा दी गई है। हालांकि दिल्ली और इंदौर में बीआरटीएस पूरी तरह सफल नहीं हुआ।

क्या है बीआरटीएस
बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत 3 से 6 मीटर रोड पर एक कॉरिडोर बनाया जाता है। इसमें केवल बस का परिचालन होता है। निजी वाहनों की इंट्री कॉरिडोर में नहीं होती है, इसलिए यह निर्धारित समय पर अपने स्टॉपेज पर पहुंचती है। मेट्रो ट्रेन की तरह ही इसके भी स्टेशन बनाए जाते हैं, जहां लोगों को बस के रूट, आने-जाने की जानकारी समेत अन्य सुविधाएं मिलती हैं।

18 करोड़ खर्च पर एक किमी लंबा कॉरिडोर बनेगा
एक किमी लंबा स्टैंडर्ड कैटेगरी के बीआरटीएस कॉरिडोर बनाने पर करीब 18 करोड़ खर्च होंगे। इसमें प्राइवेट ऑपरेटर से बस लेकर चलाया जा सकता है या सरकार भी बस खरीद सकती है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा तैयार पॉलिसी में अधिकतर शहरों में प्राइवेट पार्टी से बस लेकर चलाने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए 30 से 40 रु. प्रति किमी किराया देने का भी रुल बना है।
इनपुट: DBC

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