यदि बिहार में भी लागु होता है SC का यह आदेश तो लालू, राबड़ी, नीतीश और मांझी को भी लगेगा बड़ा झटका


यूपी के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करना पड़ेगा। उन्हें आजीवन बंगले की सुविधा देने वाले कानून को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पद छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री और आम आदमी में कोई फर्क नहीं रहता। ऐसे में उन्हें बंगले की विशेष सुविधा क्यों दी जाए? अभी पूर्व सीएम एनडी तिवारी, मुलायम सिंह, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, अखिलेश यादव और मायावती को सरकारी बंगला मिला हुआ है।

– जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने कहा, “यूपी सरकार का कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है। सरकारी बंगला सार्वजनिक संपत्ति है। यह सिर्फ जनता के लिए काम करने वालों की खातिर है।’ सीएम पद छोड़ने वाला जनप्रतिनिधि के रूप में अन्य प्रोटोकॉल और सुरक्षा तो मांग सकता है, लेकिन आजीवन आवास की सुविधा समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। यह नियम एक अलग श्रेणी के गठन की बात करता है। सिर्फ महत्वपूर्ण पद पर काम करने के आधार पर किसी को सरकारी आवास देने की बात गलत है।

– यूपी में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास देने संबंधी कानूनी नियम को सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में रद्द कर दिया था। इसके बाद यूपी सरकार ने कानून में संशोधन कर इसे अनिवार्य कर दिया। यूपी मंत्री एक्ट 1981 की धारा 4 (3) के प्रावधानों को लोक प्रहरी नामक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

लखनऊ में 2400 वर्ग मीटर का किराया महज 4200 रुपए
नाम एरिया (वर्ग मी.) किराया (रु.)
एनडी तिवारी 1056 4212
मुलायम सिंह 2436 4212
कल्याण सिंह 1468 4212
मायावती 2164 4212
राजनाथ सिंह 705 2457
अखिलेश यादव 1535 4212
बिहार में आदेश लागू होने पर इनसे छिनेंगी सुविधाएं
– बिहार में 5 पूर्व मुख्यमंत्री, राज्य सरकार द्वारा दिए गए आवासों में हैं। सरकार ने उनके लिए स्टाफ से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक का इंतजाम किया हुआ है। बिहार सरकार ने इसके लिए बाकायदा कानून बनाया हुआ है।

पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली अन्य सुविधाएं

सुरक्षा:- हाउसगार्ड-5 पुलिसकर्मी , बॉडीगार्ड-5पुलिसकर्मी
वाहन:- कहीं आवाजाही के लिए बुलेट प्रूफ गाड़ी, एस्कॉर्ट और पायलट

साज-सज्जा:- जीवन भर के लिए आवास की साज-सज्जा का खर्च सरकार उठाएगी
मुफ्त बिजली:- सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकार की ओर से मुफ्त बिजली भी
8 स्टाफ:- 1 आप्त सचिव, 1 निजी सचिव, 2 स्टेनो, 3 आदेशपाल और 1 ड्राइवर।

जो पूर्व मुख्यमंत्री सियासत में सक्रिय उन्हें मिले सुविधा

मैंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं देखा है। लेकिन जहां तक पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का सवाल है, तो मेरी राय में यह वैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलती रहनी चाहिए, जो राजनीति में पूरी तौर पर सक्रिय हैं। ये लोग अपना सर्वस्व जनता, समाज, राज्य, देश को न्योछावर किए रहते हैं, सो स्टेट का भी इनके लिए कुछ जिम्मेदारी होनी चाहिए।

-जीतन राम मांझी, पूर्व मुख्यमंत्री

न्यायविदाें ने कहा- बिहार पर भी लागू होगा यह आदेश

– पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता राजीव वर्मा समेत कई कानूनी विशेषज्ञ बोले-सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिल रही सुविधाएं संविधान सम्मत नहीं हैं। यह भेदभावपूर्ण व्यवस्था है। ऐसे में यह आदेश स्वाभाविक तौर पर उन तमाम राज्यों में लागू होगा। यह कैसे हो सकता है कि एक ही व्यवस्था, किसी राज्य के लिए संविधान सम्मत नहीं होगी और वही व्यवस्था दूसरे राज्य के लिए संविधान सम्मत हो? वैसे भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरे देश के लिए प्रभावी माना जाता है।
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