भागलपुर में वाहन चलाने वाले हो जाए ख़बरदार, अब आप की ख़ैर नही, भागलपुर के लिए बड़ा क़दम उठाया गया


शहर में बढ़ रहे प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की हलचल अब जल्द ही दिखने लगेगी। धूल, धुएं और गंदगी से दूषित होने वाले पर्यावरण पर नजर रखने वाला पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड निगहबानी करेगा। इससे बढ़ रहे प्रदूषण को कंट्रोल करने में बल मिलेगा। इसके लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने विभाग के रिजनल डायरेक्टर दिनेश कुमार की पोस्टिंग भागलपुर में कर दी है।

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यही नहीं दफ्तर के लिए बियाडा ने जमीन भी तय कर दिया है। फिलहाल बोर्ड ने डीएम को पत्र भेज कर तत्काल दफ्तर के लिए दो कमरा मुहैया कराने को कहा है, ताकि बोर्ड अपना कामकाज तत्काल शुरू कर सके। गुरुवार को पटना में कंट्रोल बोर्ड की बैठक में मेयर सीमा साहा के प्रस्ताव पर सदस्यों ने मुहर लगाया। मेयर ने बताया कि मार्च में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का दफ्तर भागलपुर में खोलने के लिए प्रस्ताव दिया था, जिसे विभाग ने स्वीकृत कर लिया है। अब जल्द ही यहां दफ्तर खुलेगा और कामकाज शुरू होगा। मेयर ने बताया कि इस प्रस्ताव पर 29 मार्च को ही सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई थी। 

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पटना में कंट्रोल बोर्ड की बैठक में मेयर सीमा साहा के भागलपुर में दफ्तर खोलने के प्रस्ताव पर लगी मुहर 


ऑफिस के लिए बियाडा में जमीन तय, रिजनल डायरेक्टर की हुई पोस्टिंग बोर्ड ने डीएम को पत्र भेज दफ्तर के लिए दो कमरा उपलब्ध कराने को कहा 


पटना में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की बैठक में भागलपुर के मुद्दे पर मेयर सीमा साहा ने अपनी बात रखी। 


ठीक से काम करेंगे वाहनों की फिटनेस जांच को बने केंद्र
बोर्ड का दफ्तर खुलने से पॉल्यूशन को कम करने के लिए होने वाले जागरूकता कार्यक्रम में तेजी आएगी। शहर में चलने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं से भी पर्यावरण दूषित होता है। वाहनों की फिटनेस जांच करने के लिए बने प्रदूषण जांच केंद्रों की भी ठीक से मॉनिटरिंग होगी। इससे पूर्व जितने भी केंद्र खुले, उनकी प्रॉपर जांच नहीं हो पाती थी।

 

केंद्रों की रिपोर्ट को ही सच मान लिया जाता है, जबकि डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक वाहनों से जो काले धुएं निकलते रहते हैं, वह दूषित और खतरनाक होते हैं। खास तौर पर कल-कारखानों से निकलने वाले वेस्टेज को सीधे गंगा में बहाने जैसी समस्या का समाधान होगा।

 

दरअसल, निगम क्षेत्र के करीब 40 नाले का पानी सीधे गंगा में बहाया जाता है। नाले के माध्यम से सिल्क कारखानों का केमिकलयुक्त पानी भी गंगा में बहाया जाता है। इससे डॉल्फिन समेत जलीय जीवों के सेहत पर खतरा बना रहता है।

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