भागलपुर: त्योहारों से पहले दुरुस्त होगी पुलिसिंग, बीट सिस्टम से गश्ती, हर थाना क्षेत्र में…..!


भागलपुर: मुहर्रम और दुर्गा पूजा से पहले पुलिसिंग को चुस्त-दुरूस्त करने की कवायद शुरू हो गई है। जोनल आईजी सुशील खोपड़े ने बुधवार को डीआईजी विकास वैभव और भागलपुर, नवगछिया व मुंगेर के पुलिस कप्तानों की बैठक बुलाई, जिसमें क्राइम प्रिवेंशन और डिटेक्शन के कई बारे में कई निर्देश दिये गए। आईजी ने बताया कि त्योहारों से पहले पुलिसिंग के चुस्त-दुरूस्त होने से त्योहार बहुत हद तक शांति पूर्वक संपन्न होंगे। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आईजी ने कहा कि क्राइम प्रिवेंशन के तहत पेट्रोलिंग और गश्ती को दुरूस्त किया जाएगा।

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जिस स्थान पर सर्वाधिक घटनाएं, वही होगा क्राइम सेंटर

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हर थाना क्षेत्रों में क्राइम सेंटर चिह्नित होंगे। वैसे स्थान जहां, अक्सर घटनाएं घटती है, उन्हें क्राइम सेंटर माना जाएगा। गश्ती के दौरान चिह्नित क्राइम सेंटर पर रूकना अनिवार्य होगा। इन चिह्नित स्थानों पर अक्सर अड्डेबाजी होती है। गश्ती दौरान पुलिस एेसे अड्डेबाजी करने वाले लोगों को रोक-टोक करेगी। खास कर रात्रि गश्ती के दौरान इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। जीप के अलावा बाइक से भी गली-मोहल्ले में गश्ती होगी। हर थाने को दो-दो बाइक दिया जाएगा, जिसपर एक जवान और एक अफसर रात में उन इलाकों में गश्ती करेंगे, जहां थाने की जीप की पहुंच नहीं होती है। बीच-बीच में चिह्नित इलाकों में एक साथ दस बाइक पर सवार पुलिसकर्मी फ्लैग मार्च भी करेंगे। बाइक सवार पुलिसकर्मियों को वायरलेस सेट भी दिया जाएगा, ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके।

सीसीटीवी कैमरे से थानों की गश्ती पर रखी जाएगी नजर

तीन स्तरों पर थानों की पेट्रोलिंग की जांच होगी। हर 15 दिन में संबंधित अनुमंडल के डीएसपी या एसडीपीओ और हर 10 दिन में एसएसपी/एसपी गश्ती की औचक जांच करेंगे। संबंधित थाना या अंचल के इंस्पेक्टर रोजाना गश्ती को चेक करेंगे। गश्ती में लापरवाही बरतने वाले पुलिस पदाधिकारियों को दंडित किया जाएगा। सीसीटीवी कंट्रोल रूम में लॉगबुक रखा रहेगा और कैमरे के जरिए थानों की गश्ती को चेक किया जाएगा। लॉगबुक में भरा जाएगा कि इतने समय में अमुख थाने की गश्ती अमुख स्थान पर थी। गश्ती के दौरान जीप में लगा वायरलेस को ऑन रखना होगा, ताकि कभी भी लोकेशन लिया जा सके।

क्या है बीट सिस्टम, कैसे करेगा काम

भागलपुर में अब तक बीट सिस्टम लागू नहीं है। लेकिन रात्रि गश्ती में इसे प्रयोग के तौर पर लागू किया जा रहा है। हर मोहल्ले और वार्ड की जिम्मेदारी हवलदार या जमादार स्तर के पुलिसकर्मियों पर होगी। यानी ये पुलिसवाले अपने-अपने वार्ड या मोहल्ले के प्रभारी होंगे। किसी भी तरह की वारदात होने पर सबसे पहले इनसे ही से पूछा जाएगा। नियमित रूप से बीट प्रभारी अपने-अपने इलाके की गश्ती करेंगे। उनके इलाके में कौन अपराधी है, जेल में है या बाहर, इसकी भी जानकारी रखेंगे। दिल्ली समेत अन्य महानगरों में बीट सिस्टम के जरिए पुलिसिंग होती है। थानेदार भी पहले बीट प्रभारी से ही जानकारी लेंगे कि क्या घटना घटी है। बीट प्रभारी अपने इलाके के हर लोगों की प्रोफाइल की भी जानकारी रखेंगे।

गिरफ्तारी और केस निष्पादन पर भी जोर

क्राइम प्रिवेंशन के अलावा आईजी ने डिटेक्शन पर भी जोर दिया है। आईजी ने कहा कि हर बड़े केसों में आरोपियों की गिरफ्तारी हो। गिरफ्तारी न होने की सूरत में कुर्की-जब्ती और आगे की कार्रवाई हो। रिपोर्टिंग से ढाई गुणा ज्यादा केसों का निष्पादन हो, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
इनपुट: DBC



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