भागलपुर: इतने हजार में दी गई थी प्रॉपर्टी डीलर मनोज यादव की हत्या की सुपारी, शूटर गिरफ्तार


भागलपुर: चौधरीडीह निवासी प्रॉपर्टी डीलर मनोज यादव की हत्या मामले में पुलिस ने बरारी के मधु चौक निवासी शूटर कैलाश यादव को गिरफ्तार किया है। वह कुख्यात अभय यादव का रिश्तेदार है। घटनास्थल पर उसके मोबाइल का लोकेशन वारदात के समय मिला था। पूछताछ में उसने हत्याकांड में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उसने पुलिस को बताया कि 30 हजार में मनोज के हत्या की सुपारी दी गई थी। सुपारी किसने दी, पुलिस अभी स्पष्ट नहीं कर रही है। प्रेसवार्ता में एसएसपी आशीष भारती ने बताया कि नौ अप्रैल को बरारी के रेलवे कॉलोनी, दुर्गा स्थान के पास मनोज यादव की उस समय गोली मार कर हत्या कर दी गई थी, जब वह दाह-संस्कार से घर लौट रहे थे। वारदात के बाद सिटी डीएसपी राजवंश सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया था, जिसमें बरारी थानेदार रोहित कुमार सिंह, जमादार नंद मोहन सिंह, समीर कुमार डे, मदन मोहन यादव और डीआईयू प्रभारी को शामिल किया गया था। तकनीकी सुराग के आधार पर पुलिस ने घर से कैलाश को गिरफ्तार किया है। एसएसपी ने बताया कि सुपारी की रकम 30 हजार के अलावा जमीन भी देने की बात सुपारी के रूप हुई थी। किसने सुपारी दी, अभी यह स्पष्ट नहीं है। गिरफ्तारी के बाद उसके नाम का खुलासा किया जाएगा। लेकिन जमीन को लेकर प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की गई थी।

सुपारी किसने दी, पुलिस अभी नहीं कर रही है स्पष्ट
जमीन को लेकर दीना से मनोज की चल रही थी अदावत
सूत्रों ने बताया कि दीना नामक एक व्यक्ति ने मनोज की हत्या की सुपारी दी थी। जमीन को लेकर दीना से मनोज की अदावत चल रही थी। इसके अलावा शूटर कैलाश यादव के पिता की हत्या में भी मनोज संदिग्ध था। इस कारण हत्या की सुपारी लेने में कैलाश नहीं चूका।

हिमांशु की हत्या में भी शामिल था कैलाश
30 सितंबर 2016 को बरारी के संतनगर हनुमान घाट में हुई हिमांशु शेखर पंडित की गोली मार कर हत्या में कैलाश यादव शामिल था। घर के बाहर हिमांशु की गोली मार हत्या की गई थी। उसके पिता आर्मी से वीआरएस लेकर घोघा के एक बैंक में नौकरी कर रहे है। इस मामले में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। बाद में जांच में आया था कि दोस्त किराना व्यवसायी से रंगदारी मांगे जाने में हिमांशु ने हस्तक्षेप किया था।
लाइनर की पुलिस नहीं कर पाई पहचान

हत्या में दो शूटरों की पुलिस ने पहचान की थी। एक कैलाश यादव थी, दूसरा लाइनर। लाइनर ने मनोज की पहचान की थी। इसके बाद कैलाश ने उसे गोली मारी थी और पैदल घटनास्थल से फरार हो गए।

हत्या के 25 दिन बात मुकर गया था बेटा, सात नामजद को बताया था निर्दोष
उधर, मनोज की हत्या के बाद 25 दिन बाद उसके पुत्र दीपक कुमार ने कोर्ट में शपथ-पत्र देकर 10 नामजद आरोपियों में सात को निर्दोष बताया था। शपथ-पत्र में पुत्र ने कहा था कि नामजद आरोपी विनोद यादव, रितेश यादव उर्फ रितु, मुन्ना यादव, रतन यादव, फंटूश यादव उर्फ फंटा, बेचन यादव, अरविंद यादव (सभी चौधरीडीह, लोदीपुर निवासी) स्पष्ट रूप से हत्या में शामिल होने की बात पुलिस को नहीं बताया गया था। बल्कि यह बताया गया था कि उक्त लोगों से आज के समय में बहुत अच्छा संबंध है। लेकिन उनका नाम उस रूप में नहीं आकर अभियुक्त के रूप में आ गया, जो निर्दोष है। मेरे पिता की हत्या में उक्त लोगों की पहचान भी मारने वालों के रूप में नहीं की गई थी। पुलिस ने दस नामजद आरोपी विनोद यादव, रितेश यादव उर्फ रितु यादव, मुन्ना यादव, रतन यादव, फंटूश यादव उर्फ फंटा, बेचन यादव, अरविंद यादव, शंकर यादव, संतोष यादव और पप्पू मोदी में रितेश, मुन्ना और रतन को छोड़ कर बाकी सात को जेल भेजा था।
इनपुट: DBC

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