अब AMU विवाद में कूदे बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन, जिन्ना को लेकर दिया बड़ा बयान, पीठ थपथपा सकती है पार्टी


अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर जारी विवाद में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन भी कूद पड़े हैं. इस मामले में उन्होंने एक बड़ा बयान दिया है. जिसके बाद उनकी पार्टी एक बार फिर से उनकी पीठ थपथपा सकती है. शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से तुरंत हटाई जानी चाहिए. शाहनवाज हुसैन ने जिन्ना को भारत के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जिन्ना की जिद ने ही भारत का बंटवारा करा दिया, वरना आज भारत पूरे इलाके में बड़ी महाशक्ति होता.

उन्होंने इस मामले में फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान यह कहा, “अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर की कोई जरुरत नहीं है. जिन्ना की टू नेशन थ्योरी थी. जिसने न केवल हिंदुस्तान का नुकसान किया, बल्कि इस पूरे इलाके में भारत एक बड़ी शक्ति होती, उसको रोकने का काम किया. जिन्ना की सोच ऐसी थी जिसमें बहुत अड़ने वाली सोच थी. भारत के मुसलमानों ने पाकिस्तान मांगा नहीं था जिस शिद्दत से जिन्ना ने अपनी जिद में बनवाया.’ उन्होंने कहा कि जिन्ना ने अपने ईगो में अलग पाकिस्तान बनवाया.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे यह कहा कि जब इस मुल्क का बंटवारा हुआ तो बंटवारे में कई चीजें पाकिस्तान चली गई. जैसे आबादी भी गई, रिजर्व बैंक के पैसे में भी बंटवारा हुआ, तो फिर यह तस्वीर क्यों रखी गई है. इसको भी दे देना चाहिए. यह तस्वीर भी पाकिस्तान एम्बेसी को लेकर जाकर सौंप देनी चाहिए. उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आजादी के पहले की ही तस्वीर है तो इसकी अब क्या जरूरत है, क्यों लगी हुई है एमयू में. एमयू के छात्रों के प्रेरणास्रोत एपीजे अब्दुल कलाम और मौलाना आजाद हो सकते हैं. जिन्ना नहीं, ऐसे में एमयू के छात्र संघ के हॉल में इस तस्वीर का क्या मतलब है. उन्होने कहा कि भारत रत्न हैं बिस्मिल्ला खान, भारत रत्न हैं ए पी जे अब्दुल. इनकी कलाम की तस्वीर वहां लगानी चाहिए जिनकी पूरे हिंदुस्तान में इज्जत है.

उन्होंने यह भी कहा कि हमारी राय है कि जिन्ना की तस्वीर हिंदुस्तान के बच्चों के दिमाग में अच्छी बात नहीं डालती. तस्वीर इज्जत से लगाई जाती है. लेकिन, जिन्ना के लिए तो भारत का मुसलमान ही बहुत नाराज रहता है. अगर आप देखेंगे कि जिन्ना के प्रति नाराजगी जितना भारत के हिंदू में है, उतनी ही नाराजगी मुसलमानों में भी मिलेगी. जिन्ना ने मुल्क को नहीं बांटा होता तो आज न तो सीमा पर झगड़ा हो रहा होता और न ही आतंकवाद इस तरह होता, जो व्यक्ति हिंदुस्तान की बर्बादी का जिम्मेदार हो, उसकी तस्वीर क्यों लगाएं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि ये ठीक है कि वो व्यक्ति अपने मुल्क का कायदे आजम है तो उसकी तस्वीर वहां पर लगे. लेकिन, जिन्ना की इज्जत तो पाकिस्तान में भी नहीं है, तो फिर क्यों हिंदुस्तान उनकी इज्जत को ढोता रहे. बंटवारे के दोषी सिर्फ और सिर्फ जिन्ना ही थे, जिन्ना की जिद से बंटवारा हुआ और कुछ कुर्सी के और लोग लालची होंगे, लेकिन, बंटवारे के मुख्य जिम्मेदार तो जिन्ना ही थे. लिहाजा उनकी तस्वीर को हर हाल में एमयू से हटा देना चाहिए.

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